Israel के मॉडल पर गुरुग्राम में सप्लाई होगा साफ पानी, इंदौर की घटना के बाद निगम तैयार करेगा डेटा सेंटर
इस परियोजना के तहत गुरुग्राम की हर गली और पाइपलाइन की डिजिटल मैपिंग की जा रही है। निगम के माइक्रो डेटा सेंटर में प्रत्येक सेक्टर और कॉलोनी का ऐसा डेटा होगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि किस पाइपलाइन की मोटाई कितनी है

Israel : साइबर सिटी की जल वितरण व्यवस्था अब पूरी तरह से ‘स्मार्ट’ होने जा रही है। इंदौर में दूषित पेयजल की आपूर्ति से हुए हादसों से सबक लेते हुए, नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने शहर की प्यास बुझाने के लिए एक अभूतपूर्व तकनीकी खाका तैयार किया है।
अब शहर की जल आपूर्ति को किसी कर्मचारी के भरोसे छोड़ने के बजाय, एक माइक्रो डेटा सेंटर के जरिए संचालित किया जाएगा। यह केंद्र इजरायल की जल संरक्षण तकनीक और ओडिशा के ‘सुजल मिशन’ का एक हाइब्रिड मॉडल होगा।
इस परियोजना के तहत गुरुग्राम की हर गली और पाइपलाइन की डिजिटल मैपिंग की जा रही है। निगम के माइक्रो डेटा सेंटर में प्रत्येक सेक्टर और कॉलोनी का ऐसा डेटा होगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि किस पाइपलाइन की मोटाई कितनी है और वहां कितने वैध कनेक्शन हैं। जीएमडीए और नहरी विभाग से मिले आंकड़ों के आधार पर मुख्य स्रोत से लेकर उपभोक्ता के नल तक पानी के प्रवाह की पल-पल की निगरानी होगी।
निगम ने अपने 138 बूस्टिंग स्टेशनों और 700 से अधिक ट्यूबवेलों को एक विशिष्ट आईडी (Unique ID) दे दी है। मोटरों पर लगे विशेष सेंसर बिजली आपूर्ति या तकनीकी खराबी होते ही डेटा सेंटर को अलर्ट भेज देंगे। अधिकारियों को फील्ड स्टाफ की रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना होगा। टैंक खाली होने से पहले ही सिस्टम को सूचना मिल जाएगी, जिससे आपूर्ति बाधित होने से पहले ही सुधार किया जा सकेगा।

अक्सर देखा जाता है कि एक इलाके में पानी का दबाव कम होता है और दूसरे में पानी सड़कों पर बह रहा होता है। इसे रोकने के लिए स्काडा (SCADA) सिस्टम और फ्लो मीटर का सहारा लिया जा रहा है। यह तकनीक एक ही छत के नीचे बैठकर शहर के किसी भी कोने के वाल्व को नियंत्रित करने में सक्षम होगी। निगम का लक्ष्य ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ सुविधा देना है, जिससे लोग सीधे नल से पानी पी सकें।
निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने बताया कि शहर की जल आपूर्ति को आधुनिक बनाने के लिए हम माइक्रो डेटा सेंटर पर काम कर रहे हैं। इससे आपूर्ति और मांग के बीच का अंतर समाप्त होगा। सर्वे का काम पूरा हो चुका है और जल्द ही यह प्रणाली धरातल पर होगी।











